Shri Pardeshwar Shiv Mandir

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पारद शिवलिंग — रसराज का रहस्य

भारत के सबसे दुर्लभ पारद शिवलिंगों में से एक — हजारों साल पुराने भारतीय रसायन विज्ञान का जीवंत प्रमाण

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आपने बहुत से शिवलिंग देखे होंगे — पत्थर के, मिट्टी के, धातु के। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा शिवलिंग भी है जो शुद्ध पारे (Mercury) से बना है? जिसे बनाने में हजारों साल पुरानी वैज्ञानिक प्रक्रिया का इस्तेमाल होता है? जिसके बारे में खुद भगवान शिव ने वेदों में कहा है?

पारद क्या होता है? — सिर्फ धातु नहीं, शिव का स्वरूप

संस्कृत में “पारद” का शाब्दिक अर्थ है — “जो दूसरी ओर ले जाए।” अर्थात जो इंसान को सांसारिक कष्टों से परे लेकर जाए। आधुनिक विज्ञान में इसे Mercury (Hg) कहते हैं।

पारद इस पृथ्वी पर पाई जाने वाली एकमात्र ऐसी धातु है जो सामान्य तापमान पर तरल रहती है। यही इसकी सबसे बड़ी विलक्षणता है। जब बाकी सभी धातुएं ठोस होती हैं — लोहा, सोना, चाँदी — तब पारद बहता रहता है।

आयुर्वेद के रसशास्त्र में पारद को “रसराज” की उपाधि दी गई है। लेकिन इससे भी बड़ी बात यह है कि शिव पुराण में स्वयं भगवान शिव ने माता पार्वती को पारद का रहस्य बताया:

शिव पुराण — भगवान शिव के मुख से
मम बीजं तू पारदः
— शिव पुराण
📖 सरल हिंदी अर्थ और विस्तार
“पारद ही मेरा बीज है।” — ये शब्द स्वयं भगवान शिव के हैं जो उन्होंने माता पार्वती को बताए।

बीज से वृक्ष जन्म लेता है — उसी प्रकार पारद शिव की ऊर्जा का भौतिक स्वरूप है। इसीलिए पारद से बना शिवलिंग सामान्य पत्थर के शिवलिंग से कहीं अधिक शक्तिशाली और चेतन माना जाता है।

🔍 एक महत्वपूर्ण तथ्य: पारद अन्य तत्वों में मिलने के बाद भी अपनी मूल पहचान नहीं खोता — यह आधुनिक रसायन विज्ञान में भी सिद्ध है। Mercury का Amalgam बनाने का गुण अद्वितीय है। यही बात आयुर्वेद ने “रसराज” कहकर हजारों साल पहले कही थी।

वैदिक ग्रंथ

वैदिक ग्रंथों में पारद — रस रत्न समुच्चय और नागार्जुन

भारतीय आयुर्वेद की एक विशेष शाखा है रसशास्त्र। इस पूरी शाखा का नाम ही “रस” — यानी पारद — के नाम पर है। रसशास्त्र का सबसे प्रामाणिक ग्रंथ है रस रत्न समुच्चय। इसमें पारद के बारे में एक मूल श्लोक है:

रस रत्न समुच्चय — रसशास्त्र का प्रमाण ग्रंथ
रसो रसायनश्रेष्ठो रसेन्द्रो रसनायकः। शिवबीजं महातेजः सर्वव्याधिविनाशनम्॥
— रस रत्न समुच्चय
📖 सरल हिंदी अर्थ — शब्द दर शब्द
रसो रसायनश्रेष्ठः — पारद सभी रसायनों में श्रेष्ठ है।
रसेन्द्रः रसनायकः — यह रसों का राजा और नायक है।
शिवबीजं महातेजः — यह भगवान शिव का महातेजस्वी बीज है।
सर्वव्याधिविनाशनम् — यह सभी व्याधियों (रोगों) का नाश करने वाला है।

सार: पारद सिर्फ एक धातु नहीं — यह शिव की ऊर्जा का वाहक है और समस्त रोगों का नाशक है।

आचार्य नागार्जुन — भारतीय रसायन विज्ञान के जनक

10वीं सदी के महान आचार्य नागार्जुन ने पारद के गुणों और उसकी शुद्धि पर अपना पूरा जीवन लगाया। उन्होंने रसरत्नाकर ग्रंथ की रचना की जो आज भी रसशास्त्र का सबसे विश्वसनीय स्रोत माना जाता है।

नागार्जुन ने यह सिद्ध किया कि कच्चा पारद विषैला होता है लेकिन अष्ट संस्कार के बाद वही पारद जीवनदायी बन जाता है।

महामृत्युञ्जय मंत्र — ऋग्वेद का सबसे पवित्र मंत्र

ऋग्वेद ७.५९.१२ — महामृत्युञ्जय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
— ऋग्वेद, मण्डल ७, सूक्त ५९, श्लोक १२
📖 सरल हिंदी अर्थ — शब्द दर शब्द
त्र्यम्बकं यजामहे — हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की उपासना करते हैं।
सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् — जो सुगंधित हैं और जीवन को पोषण-शक्ति देते हैं।
उर्वारुकमिव बन्धनान् — जिस प्रकार ककड़ी पक जाने पर अपनी बेल से स्वयं अलग हो जाती है।
मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् — उसी प्रकार हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करके अमृत की ओर ले जाएँ।

सार: यह मंत्र सिर्फ मृत्यु से नहीं — सभी भय, रोग और कष्टों से मुक्ति का आह्वान करता है।
पुराण प्रमाण

पुराणों में पारद शिवलिंग — चार प्रमुख ग्रंथ

१. ब्रह्म पुराण — एक दर्शन, हजार पुण्य

ब्रह्म पुराण — पारद दर्शन का फल
पारदं शिवलिङ्गं तु यः पश्येत् श्रद्धयान्वितः। सहस्रलिङ्गदर्शस्य फलं प्राप्नोति मानवः॥
— ब्रह्म पुराण
📖 सरल हिंदी अर्थ और विस्तार
“जो मनुष्य श्रद्धा से पारद शिवलिंग के दर्शन करता है, उसे एक हजार शिवलिंगों के दर्शन का पुण्य मिलता है।”

ब्रह्म पुराण आगे यह भी कहता है कि पारद शिवलिंग की पूजा से जीवन में मान-सम्मान, उच्च पद, नाम-यश, विद्या और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पारद महात्म्य — 100 अश्वमेध यज्ञ का पुण्य
शताश्वमेधेन कृतेन पुण्यं, गोकोटिभिः स्वर्ण सहस्त्र दानात्। नृणां भवेत् सूतक दर्शनेन, यत् सर्वतीर्थेषु कृताभिषेकात्॥
📖 सरल हिंदी अर्थ और विस्तार
100 अश्वमेध यज्ञ करने से, करोड़ों गायों के दान से, हजारों स्वर्ण मुद्राओं के दान से, और सभी तीर्थस्थलों पर अभिषेक करने से — जो पुण्य मिलता है, वही पुण्य पारद शिवलिंग के दर्शन मात्र से मिल जाता है।

२. शारंगधर संहिता — अष्ट सिद्धियाँ और मोक्ष

शारंगधर संहिता — अध्याय १२
पारदं सर्वरोगघ्नं पारदं मोक्षसाधनम्। पारदं सर्वसिद्धिदं पारदं शिवतुल्यकम्॥
— शारंगधर संहिता, अध्याय १२
📖 सरल हिंदी अर्थ — चार पंक्तियों का विस्तार
पारदं सर्वरोगघ्नं — पारद सभी रोगों को नष्ट करने वाला है।
पारदं मोक्षसाधनम् — पारद मोक्ष प्राप्त करने का साधन है।
पारदं सर्वसिद्धिदं — पारद सभी सिद्धियाँ देने वाला है।
पारदं शिवतुल्यकम् — पारद शिव के समान है। इसकी पूजा साक्षात् शिव की पूजा है।

३. रुद्र संहिता (शिव पुराण) — माँ लक्ष्मी का स्थायी निवास

रुद्र संहिता — शिव पुराण
यत्र तिष्ठति पारदं लिङ्गं पूजितं भक्तिभावतः। तत्र लक्ष्मीः स्थिरा तिष्ठेत् पीढ़ी पर्यन्तं निश्चितम्॥
— रुद्र संहिता, शिव पुराण
📖 सरल हिंदी अर्थ और विस्तार
“जहाँ पारद शिवलिंग की सच्चे भाव से पूजा होती है, वहाँ माँ लक्ष्मी पीढ़ियों तक स्थिर रहती हैं।”

यहाँ “लक्ष्मी” का अर्थ केवल पैसा नहीं है — धन, स्वास्थ्य, सुख, शांति, सौंदर्य और समृद्धि — यानी जीवन के सभी अच्छे पहलू।

४. पारद संहिता — रोग-मुक्ति और अकाल मृत्यु से रक्षा

पारद संहिता एकमात्र ऐसा ग्रंथ है जो विशेष रूप से पारद को समर्पित है। इसमें कहा गया है कि अष्ट संस्कार से तैयार पारद शिवलिंग के दर्शन मात्र से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।

💡 जरूरी बात: इन सभी श्लोकों में जो “पारद” की बात हो रही है, वह अष्ट संस्कार से शुद्ध पारद है — न कि कच्चा और विषैला पारा। अष्ट संस्कार के बारे में अगले चरण में विस्तार से पढ़ें।

वैज्ञानिक शुद्धि

अष्ट संस्कार — पारद की 8 चरणों की वैज्ञानिक शुद्धि

कच्चा पारद (Mercury) जहरीला होता है — यह बात आधुनिक विज्ञान भी मानता है। लेकिन हमारे ऋषियों ने हजारों साल पहले ही इसका समाधान खोज लिया था — जिसे अष्ट संस्कार कहते हैं।

पारद संहिता — अष्ट संस्कार मूल श्लोक
स्वेदनं मर्दनं मूर्च्छा उत्थापनं पातनं तथा। रोधनं नियामनं च दीपनं चाष्ट संस्काराः॥
— पारद संहिता
📖 सरल हिंदी अर्थ
आठों संस्कारों के नाम क्रम से: स्वेदन, मर्दन, मूर्च्छन, उत्थापन, पातन, रोधन, नियामन और दीपन। प्रथम पाँच संस्कारों से पारद के सभी विष नष्ट होते हैं। अंतिम तीन संस्कारों से पारद में बल और तेज की वृद्धि होती है।

स्वेदन — उबालना (Boiling Process)

पारद को नीम, त्रिफला और अन्य जड़ी-बूटियों के काढ़े में धीरे-धीरे उबाला जाता है। यह प्रक्रिया पारद में मौजूद भारी अशुद्धियों को बाहर निकालती है।

मर्दन — पीसना (Trituration)

पारद को खरल में हल्दी, नींबू, नीम और 24 दुर्लभ जड़ी-बूटियों के साथ घंटों तक पीसा जाता है। इससे पारद के विषैले गुण कम होते हैं।

मूर्च्छन — विशेष मिश्रण (Amalgamation)

पारद को विशेष औषधीय रसों जैसे आँवला, बेल, शंखपुष्पी के साथ मिलाकर एक विशेष अवस्था में लाया जाता है।

उत्थापन — जागृत करना (Revitalization)

पारद को मूर्च्छित अवस्था से पुनः जागृत किया जाता है और नए पात्र में स्थानांतरित किया जाता है।

पातन — आसवन (Distillation)

पारद को आसवन की प्रक्रिया से गुजारा जाता है। इस चरण के बाद पारद के सभी विषैले तत्व लगभग समाप्त हो जाते हैं।

रोधन — बाँधना (Solidification Process Start)

पारद को बाँधने की प्रक्रिया शुरू होती है — तरल पारद को ठोस रूप देने की दिशा में कार्य आरंभ होता है।

नियामन — स्थिर करना (Stabilization)

पारद के गुणों को नियंत्रित और स्थिर किया जाता है। इस चरण में सुनिश्चित किया जाता है कि पारद की ऊर्जा लंबे समय तक बनी रहे।

दीपन — ऊर्जा सक्रिय करना (Activation)

अंतिम चरण में पारद की ऊर्जा और तेज को पूरी तरह सक्रिय किया जाता है। इसके बाद पारद एक ठोस, शुद्ध और ऊर्जावान शिवलिंग का रूप धारण करने के लिए तैयार होता है।

प्रमुख जड़ी-बूटियाँ: नीम, हल्दी, आँवला, बेलपत्र, चित्रक, शंखपुष्पी, नींबू, भिलावा, पुत्रजीवा, लाजवंती, जटामांसी, इंद्रवन — और कई दुर्लभ हिमालयी औषधियाँ।

शरीर और मन

पारद शिवलिंग का शरीर और मन पर क्या प्रभाव होता है?

यह सवाल सबसे ज्यादा लोग पूछते हैं — “क्या सच में पारद शिवलिंग के दर्शन से कुछ फर्क पड़ता है?” इसका जवाब है — दोनों। आस्था तो है ही, लेकिन उसके पीछे विज्ञान भी है।

१. पारद की सूक्ष्म ऊर्जा और शरीर के चक्र

आयुर्वेद और तंत्र शास्त्र के अनुसार पारद में अत्यंत सूक्ष्म electromagnetic energy होती है। जब हम शुद्ध पारद शिवलिंग के समक्ष बैठते हैं, तो यह ऊर्जा हमारे शरीर के सप्त चक्रों को धीरे-धीरे संतुलित करती है।

२. मानसिक शांति — Alpha Brainwaves का विज्ञान

आधुनिक neuroscience में यह सिद्ध हो चुका है कि धार्मिक स्थान पर शांत बैठने से brain में Alpha Brainwaves (8-12 Hz) सक्रिय होती हैं। Cortisol घटता है, Serotonin और Dopamine बढ़ते हैं।

३. वातावरण शुद्धि — नकारात्मक ऊर्जा का नाश

गंधक की वेदी पर स्थापित पारद शिवलिंग के आसपास negative ions उत्पन्न होते हैं जो हानिकारक bacteria और virus को निष्क्रिय करते हैं।

४. पारद की ध्वनि-तरंग ग्रहण क्षमता

जब मंदिर में घंटे की ध्वनि, मंत्रों का जाप और शंखनाद होता है, तो ये ध्वनि तरंगें पारद शिवलिंग से टकराकर गुणित हो जाती हैं।

🧠

मानसिक शांति

Alpha Brainwaves सक्रिय होती हैं। Cortisol कम, Serotonin बढ़ता है।

चक्र संतुलन

पारद की electromagnetic energy सप्त चक्रों को संतुलित करती है।

🌬️

वायु शुद्धि

गंधक वेदी से negative ions — bacteria-virus निष्क्रिय, श्वास बेहतर।

🔊

ध्वनि चिकित्सा

पारद ध्वनि तरंगें गुणित करता है — Healing Vibration पैदा होती है।

🛡️

इम्यूनिटी

शुद्ध पारद-आधारित औषधियाँ Immunity बढ़ाती हैं।

🔬

Anti-oxidant

Journal of Ayurveda (2016) — पारद दवाओं में antioxidant गुण सिद्ध।

समग्र लाभ

पारद शिवलिंग के प्रमुख लाभ

🙏
हजार शिवलिंगों की पूजा का पुण्य — एक दर्शन में
स्रोत: ब्रह्म पुराण
अष्ट सिद्धियाँ, मोक्ष और जीवनमुक्ति
स्रोत: शारंगधर संहिता
💛
माँ लक्ष्मी का पीढ़ियों तक स्थायी निवास
स्रोत: रुद्र संहिता
🌿
शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक रोगों से मुक्ति
स्रोत: पारद संहिता
🛡️
अकाल मृत्यु का भय समाप्त
स्रोत: रुद्र संहिता
🔱
12 ज्योतिर्लिंगों के पूजन का पुण्य एक साथ
स्रोत: पारद शिवलिंग महात्म्य
🧠
Alpha Brainwaves — गहरी मानसिक शांति
स्रोत: Neuroscience Research
सप्त चक्रों का संतुलन — ऊर्जा का जागरण
स्रोत: तंत्र शास्त्र + आधुनिक व्याख्या
🌬️
Negative ions — वायु शुद्धि और श्वास में सुधार
स्रोत: Environmental Science
🔬
Antioxidant और Antimicrobial गुण
स्रोत: Journal of Ayurveda (2016)
👶
संतान प्राप्ति में सहायक
स्रोत: पारद शिवलिंग महात्म्य
☮️
नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति — सकारात्मकता
स्रोत: Cymatics + आयुर्वेद
आधुनिक शोध

आधुनिक विज्ञान और पारद — शोध क्या कहते हैं?

ScienceDirect (2016) — Journal of Ayurveda and Integrative Medicine में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि अष्ट संस्कार से शुद्ध पारद-आधारित नैनोस्केल दवाओं में antioxidant गुण मौजूद हैं।

ResearchGate — Multiple studies में यह सामने आया कि रसशास्त्र की शुद्ध पारद-आधारित औषधियाँ antimicrobial हैं।

आधुनिक रसायन का दृष्टिकोण: Mercury की unique electron configuration इसे असाधारण बनाती है। एक बार बना पारद शिवलिंग सैकड़ों वर्षों तक अपनी ऊर्जा बनाए रखता है।

⚠️ महत्वपूर्ण: कच्चा पारद (Raw Mercury) अत्यंत विषैला होता है। केवल अष्ट संस्कार से शुद्ध पारद ही पूजनीय और सुरक्षित है। पारद-आधारित औषधियाँ प्रमाणित आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह पर ही लें।

श्री पारदेश्वर शिव मंदिर — संभाजीनगर (औरंगाबाद)

यह मंदिर क्यों बना? कैसे बना? और यहाँ ऐसा क्या है जो इसे खास बनाता है?

11 फरवरी 2002
मंदिर की स्थापना तिथि (वसंत पंचमी)
श्री आनंद मिश्रा गुरुजी

जब श्री आनंद मिश्रा गुरुजी मात्र 13 वर्ष के थे, दौलताबाद किले के पास निंभोरकर गुरुजी ने भविष्यवाणी की: “तुम अपने हाथों से एक भव्य और दिव्य शिव मंदिर का निर्माण करोगे।”

20 वर्ष की आयु में वे हरिद्वार पहुँचे, दीक्षा ली और फिर हिमालय में 16 वर्षों तक गहरी साधना की। इस दिव्य यात्रा का परिणाम है यह पारदेश्वर मंदिर

🔱
111 KG पारद शिवलिंग
भारत में केवल 4-6 ऐसे शिवलिंग
🟡
151 KG गंधक वेदी
शुद्ध सल्फर की दिव्य वेदी
🏛️
पशुपतिनाथ शैली
महाराष्ट्र में दुर्लभ वास्तुकला
🔔
75 KG घंटा
काँसे का विशाल नादब्रह्म
🏺
पंचकलश
बद्रीनाथ-केदारनाथ शैली
🐂
कर्नाटक शैली नंदी
महाराष्ट्र में अत्यंत दुर्लभ
🦁
यक्ष-यक्षिणी मूर्तियाँ
सिंह मुख, विनम्र भाव
🐗
वराह मुख
शिव मंदिर में अत्यंत दुर्लभ

मंदिर की जानकारी

📍 पता कानापुर शिवार, पलशी रोड,
छत्रपती संभाजीनगर (औरंगाबाद),
महाराष्ट्र — 431008
📞 संपर्क +91 9168119081
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

FAQ — लोग पारद शिवलिंग के बारे में सबसे ज्यादा क्या जानना चाहते हैं?

पारद शिवलिंग क्या होता है और यह साधारण शिवलिंग से कैसे अलग है?
पारद शिवलिंग शुद्ध पारे (Mercury) से बना शिवलिंग होता है। साधारण शिवलिंग पत्थर, मिट्टी या अन्य धातुओं से बनते हैं — लेकिन पारद शिवलिंग बनाने के लिए अष्ट संस्कार नामक 8 चरणों की जटिल वैज्ञानिक शुद्धि प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

शिव पुराण में स्वयं भगवान शिव ने कहा है — “मम बीजं तू पारदः” — यानी पारद शिव का बीज है। ब्रह्म पुराण कहता है कि इसके दर्शन मात्र से 1000 शिवलिंगों की पूजा का पुण्य मिलता है।
पारद शिवलिंग के दर्शन से शरीर पर क्या वैज्ञानिक प्रभाव होता है?
हाँ, इसके पीछे कई वैज्ञानिक कारण हैं:

1. Electromagnetic Energy: शुद्ध पारद में अद्वितीय electromagnetic field होती है।

2. Alpha Brainwaves: मंदिर के शांत वातावरण से Alpha Brainwaves (8-12 Hz) सक्रिय होती हैं। Cortisol घटता है, Serotonin-Dopamine बढ़ते हैं।

3. Negative Ions: 151 KG गंधक की वेदी से negative ions उत्पन्न होते हैं।

4. Journal of Ayurveda (2016): पारद-आधारित दवाओं में antioxidant गुण पाए गए।
अष्ट संस्कार क्या है? क्या यह पारद को safe बनाता है?
कच्चा पारद (Raw Mercury) वाकई जहरीला होता है। लेकिन अष्ट संस्कार 8 चरणों की वैज्ञानिक शुद्धि प्रक्रिया है:

स्वेदन → मर्दन → मूर्च्छन → उत्थापन → पातन → रोधन → नियामन → दीपन

पहले 5 संस्कारों से पारद के सभी विष नष्ट होते हैं, और अंतिम 3 से उसमें बल और तेज बढ़ता है। इस प्रक्रिया में नीम, हल्दी, आँवला, शंखपुष्पी सहित 24 जड़ी-बूटियों का उपयोग होता है।
भारत में कुल कितने पारद शिवलिंग हैं?
पूरे भारत में केवल 4 से 6 शुद्ध पारद शिवलिंग मौजूद हैं। इसकी कमी का कारण यह है कि अष्ट संस्कार की प्रक्रिया अत्यंत जटिल, समय-साध्य और दुर्लभ जड़ी-बूटियों की माँग करती है।

श्री पारदेश्वर शिव मंदिर, संभाजीनगर में स्थापित 111 किलो का पारद शिवलिंग इनमें से सबसे बड़े और प्रमाणित शिवलिंगों में से एक है।
श्री पारदेश्वर मंदिर कब और किसने स्थापित किया?
इस मंदिर की स्थापना 11 फरवरी 2002 (वसंत पंचमी) को श्री आनंद मिश्रा गुरुजी (श्री श्री आनंद गिरि जी महाराज) ने की।

मात्र 13 वर्ष की आयु में एक संत ने भविष्यवाणी की कि वे एक भव्य शिव मंदिर बनाएंगे। 20 वर्ष की आयु में हरिद्वार जाकर दीक्षा ली। हिमालय में 16 वर्षों तक साधना की। फिर 2002 में संभाजीनगर में यह मंदिर स्थापित हुआ।
पारद शिवलिंग की पूजा विधि क्या है?
1. सीधा अभिषेक नहीं: पारद शिवलिंग पर सीधे जल, दूध आदि से अभिषेक नहीं किया जाता। श्री पारदेश्वर मंदिर में इसके लिए अलग शिवलिंग की व्यवस्था है।

2. दर्शन और ध्यान: पारद शिवलिंग के सामने श्रद्धा के साथ खड़े होकर दर्शन करना और मन को शांत करके ध्यान लगाना सबसे उत्तम पूजा है।

3. मंत्र जाप: ॐ नमः शिवाय, महामृत्युञ्जय मंत्र और रुद्राष्टकम् का पाठ विशेष फलदायी है।

4. पुष्प और धूप: बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित किए जा सकते हैं।

5. सोमवार और प्रदोष: सोमवार का दिन और प्रदोष काल विशेष महत्व रखते हैं।
क्या विदेशी पर्यटक भी इस मंदिर में आ सकते हैं?
बिल्कुल! श्री पारदेश्वर शिव मंदिर सभी के लिए खुला है — चाहे आप किसी भी धर्म, देश या आस्था से हों।

यह मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि भारत की प्राचीन धातुविज्ञान और रसायन शास्त्र की परंपरा का जीवंत उदाहरण भी है।

संपर्क: +91 91681 19081 | shripardeshwarshivmandir.in
संदर्भ ग्रंथ

स्रोत और संदर्भ

  • शिव पुराण — “मम बीजं तू पारदः”
  • ब्रह्म पुराण — पारद शिवलिंग दर्शन फल
  • शारंगधर संहिता (अध्याय १२) — अष्ट सिद्धियाँ
  • रुद्र संहिता (शिव पुराण) — माँ लक्ष्मी निवास
  • पारद संहिता — अष्ट संस्कार और रोग मुक्ति
  • रस रत्न समुच्चय — पारद का रसायन महत्व
  • रसरत्नाकर — आचार्य नागार्जुन रचित
  • ऋग्वेद ७.५९.१२ — महामृत्युञ्जय मंत्र
  • Journal of Ayurveda & Integrative Medicine (2016)
  • ScienceDirect — Mercury Nanoscale Antioxidant Study

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