Shri Pardeshwar Shiv Mandir

श्री पारदेश्वर शिव मंदिर संभाजीनगर | 111 किलो पारद शिवलिंग — पुराण, रसशास्त्र और विज्ञान
भारत के सबसे दुर्लभ पारद शिवलिंगों में से एक

श्री पारदेश्वर शिव मंदिर, संभाजीनगर
पारद शिवलिंग — पुराण, रसशास्त्र
और विज्ञान का दिव्य संगम

औरंगाबाद में बसा यह मंदिर सिर्फ दर्शन की जगह नहीं — हजारों साल पुराने भारतीय रसायन विज्ञान और गहरी आस्था का जीता-जागता प्रमाण है।

१११किलो शुद्ध पारद
१५१किलो गंधक वेदी
४–६भारत में कुल पारद शिवलिंग
२००५प्रतिष्ठा वर्ष
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छत्रपती संभाजीनगर (औरंगाबाद), महाराष्ट्र — यह शहर वैसे तो अजंता-एलोरा की विश्वप्रसिद्ध गुफाओं के लिए जाना जाता है। लेकिन यहाँ CIDCO इलाके में कानापुर शिवार, पलशी रोड के पास एक ऐसा मंदिर है जो केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि हजारों साल पुराने भारतीय रसायन विज्ञान का जीवंत प्रमाण भी है।

यहाँ विराजमान है 111 किलो शुद्ध पारद (Mercury) से बना दुर्लभ शिवलिंग — जो 151 किलो गंधक (सल्फर) की वेदी पर स्थापित है। पूरे भारत में ऐसे केवल 4 से 6 पारद शिवलिंग ही मौजूद हैं।

पारद क्या है? — धातुओं का राजा “रसराज”

संस्कृत में “पारद” का अर्थ है — Mercury (पारा)। यह एकमात्र ऐसी धातु है जो सामान्य तापमान पर तरल रूप में पाई जाती है। आयुर्वेद और रसशास्त्र में इसे “रसराज” कहा गया है — अर्थात सभी धातुओं का राजा।

प्राचीन ऋषियों का मानना था कि पारद में ऊर्जा को धारण करने और प्रसारित करने की अद्भुत क्षमता है। इसलिए इसे भगवान शिव का स्वरूप माना गया। शिव पुराण में स्वयं भगवान शिव ने माता पार्वती को यह रहस्य बताया:

शिव पुराण
मम बीजं तू पारदः
— शिव पुराण
🔖 सरल हिंदी अर्थ
“पारद ही मेरा बीज है।” — भगवान शिव ने स्वयं माता पार्वती को यह गुप्त ज्ञान दिया। यही कारण है कि पारद से बना शिवलिंग सामान्य शिवलिंग से कहीं अधिक पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है।
✦ ॐ ✦

मंदिर की कहानी — एक दिव्य संकल्प

इस मंदिर का निर्माण श्री श्री आनंद गिरि जी महाराज ने किया। उनकी कहानी सच में प्रेरणादायक है।

जब वे मात्र 13 वर्ष के थे, तब दौलताबाद (देवगिरी) किले के पास “गुरु चरित्र” पढ़ने के बाद निंभोरकर गुरुजी ने भविष्यवाणी की: “तुम अपने हाथों से एक भव्य और दिव्य शिव मंदिर का निर्माण करोगे।”

20 वर्ष की उम्र में एक आंतरिक संदेश मिला — “उत्तर की ओर जाओ।” वे हरिद्वार पहुँचे, दीक्षा ली और फिर हिमालय में 16 वर्षों तक गहरी साधना की। वहाँ उन्होंने हिंदू, जैन, इस्लाम, ईसाई और बौद्ध — सभी धर्मों का अध्ययन किया।

इस दिव्य यात्रा का फल है वसंत पंचमी, फरवरी 2005 को स्थापित यह पारदेश्वर मंदिर — जो आज हजारों भक्तों का आस्था केंद्र बन चुका है।

✦ ॐ ✦

पुराणों में पारद शिवलिंग का महत्व

ब्रह्म पुराण — हजार शिवलिंगों की पूजा का फल

ब्रह्म पुराण
पारदं शिवलिङ्गं तु यः पश्येत् श्रद्धयान्वितः।
सहस्रलिङ्गदर्शस्य फलं प्राप्नोति मानवः॥
— ब्रह्म पुराण
🔖 सरल हिंदी अर्थ
जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति के साथ पारद शिवलिंग के दर्शन करता है, उसे एक हजार शिवलिंगों के दर्शन के समान पुण्य प्राप्त होता है। साथ ही जीवन में मान-सम्मान, उच्च पद और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।
100 अश्वमेध यज्ञ का पुण्य
शताश्वमेधेन कृतेन पुण्यं, गोकोटिभिः स्वर्ण सहस्त्र दानात्।
नृणां भवेत् सूतक दर्शनेन, यत् सर्वतीर्थेषु कृताभिषेकात्॥
🔖 सरल हिंदी अर्थ
100 अश्वमेध यज्ञ, कोटि गायों का दान, हजारों मुद्राओं का दान और सभी तीर्थों में अभिषेक — इन सबसे जो पुण्य मिलता है, वही पुण्य पारद शिवलिंग के दर्शन मात्र से प्राप्त हो जाता है।

शारंगधर संहिता (अध्याय 12) — अष्ट सिद्धियाँ और मोक्ष

13वीं-14वीं सदी में लिखा गया आयुर्वेद का यह प्रमुख ग्रंथ पारद शिवलिंग को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक — तीनों स्तरों पर लाभकारी बताता है।

शारंगधर संहिता — अध्याय 12
पारदं सर्वरोगघ्नं पारदं मोक्षसाधनम्।
पारदं सर्वसिद्धिदं पारदं शिवतुल्यकम्॥
— शारंगधर संहिता
🔖 सरल हिंदी अर्थ
पारद सभी रोगों का नाश करने वाला है। पारद मोक्ष दिलाने का साधन है। पारद सभी सिद्धियाँ देने वाला है। और पारद स्वयं शिव के समान है — इसकी पूजा साक्षात् शिव की पूजा है।

अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा सहित अष्ट सिद्धियाँ और जीवनमुक्ति इसकी पूजा से प्राप्त होती है।

रुद्र संहिता (शिव पुराण) — माँ लक्ष्मी का पीढ़ियों तक निवास

रुद्र संहिता — शिव पुराण
यत्र तिष्ठति पारदं लिङ्गं पूजितं भक्तिभावतः।
तत्र लक्ष्मीः स्थिरा तिष्ठेत् पीढ़ी पर्यन्तं निश्चितम्॥
— रुद्र संहिता
🔖 सरल हिंदी अर्थ
जहाँ पारद शिवलिंग को भक्तिभाव के साथ पूजा जाता है, वहाँ माँ लक्ष्मी पीढ़ियों तक स्थिर रूप से निवास करती हैं। उस स्थान पर कभी धन-समृद्धि की कमी नहीं होती।

रुद्र संहिता में रावण का भी उल्लेख है — रावण को रस सिद्ध योगी माना गया है और उसने पारद शिवलिंग की पूजा करके अपनी लंका को स्वर्ण लंका बनाया।

रस रत्न समुच्चय — पारद को शिव का तेजस्वी स्वरूप

रस रत्न समुच्चय
रसो रसायनश्रेष्ठो रसेन्द्रो रसनायकः।
शिवबीजं महातेजः सर्वव्याधिविनाशनम्॥
— रस रत्न समुच्चय
🔖 सरल हिंदी अर्थ
पारद सभी रसायनों में श्रेष्ठ है, यह रसों का राजा और नायक है। यह भगवान शिव का तेजस्वी बीज है और सभी रोगों का नाश करने वाला है।
✦ ॐ ✦

रसशास्त्र — भारत का प्राचीन रसायन विज्ञान

आज आधुनिक विज्ञान जिस धातुविज्ञान की बात करता है, उसका विस्तृत उल्लेख हजारों वर्ष पहले भारतीय ग्रंथों में मिलता है। आयुर्वेद की विशेष शाखा रसशास्त्र पूरी तरह पारद और धातुओं के अध्ययन पर आधारित है।

आयुर्वेद के अनुसार पारद एकमात्र ऐसा तत्व है जो अन्य तत्वों में मिलने के बाद भी अपनी मूल पहचान नहीं खोता — यह एक वैज्ञानिक तथ्य है जो आधुनिक रसायन शास्त्र में भी सिद्ध है।

आचार्य नागार्जुन — 10वीं सदी के भारतीय रसायन वैज्ञानिक

महान आचार्य नागार्जुन को भारतीय रसायन विज्ञान का जनक माना जाता है। उन्होंने पारद के शोधन, औषधीय उपयोग और ऊर्जा गुणों पर गहन शोध किया और रसरत्नाकर जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की। उन्हीं के प्रयासों से रसशास्त्र को एक स्वतंत्र और सम्मानित विज्ञान के रूप में मान्यता मिली।

✦ ॐ ✦

अष्ट संस्कार — पारद की 8 चरणों की वैज्ञानिक शुद्धि

कच्चा पारद स्वाभाविक रूप से विषैला होता है। लेकिन पारद संहिता में वर्णित अष्ट संस्कार के बाद यह पूरी तरह शुद्ध, निरापद और ठोस हो जाता है।

पारद संहिता
स्वेदनं मर्दनं मूर्च्छा उत्थापनं पातनं तथा।
रोधनं नियामनं च दीपनं चाष्ट संस्काराः॥
— पारद संहिता
🔖 सरल हिंदी अर्थ
पारद को शुद्ध और शक्तिशाली बनाने के लिए आठ विशेष प्रक्रियाएँ की जाती हैं — उबालना, पीसना, मिलाना, उठाना, आसवन, बाँधना, नियंत्रित करना और सक्रिय करना।

आठों संस्कारों को विस्तार से समझें:

स्वेदन — उबालना

पारद को विशेष जड़ी-बूटियों के काढ़े में गर्म किया जाता है। इससे उसमें मौजूद अशुद्धियाँ बाहर निकलने लगती हैं।

मर्दन — पीसना

पारद को खरल में नीम, हल्दी, नींबू और 24 दुर्लभ जड़ी-बूटियों के साथ घंटों तक पीसा जाता है।

मूर्च्छन — मिलाना

विशेष औषधीय रसों के साथ पारद को मिलाकर एक विशेष अवस्था में लाया जाता है।

उत्थापन — जागृत करना

पारद को पुनः जागृत किया जाता है और नए पात्र में रखा जाता है।

पातन — आसवन (Distillation)

आसवन की प्रक्रिया से पारद को और अधिक शुद्ध बनाया जाता है।

रोधन — बाँधना

पारद को बाँधा जाता है — उसे ठोस रूप देने की दिशा में काम शुरू होता है।

नियामन — नियंत्रित करना

पारद के गुणों को नियंत्रित और स्थिर किया जाता है।

दीपन — सक्रिय करना

अंत में पारद की ऊर्जा और तेज को सक्रिय किया जाता है। प्रथम पाँच संस्कारों से पारद सर्वदोषमुक्त होता है, शेष तीन से बल और तेज बढ़ता है।

प्रमुख जड़ी-बूटियाँ: नीम, हल्दी, आँवला, बेलपत्र, चित्रक, शंखपुष्पी, नींबू, भिलावा, पुत्रजीवा, लाजवंती, जटामांसी, इंद्रवन और कई दुर्लभ हिमालयी औषधियाँ।

✦ ॐ ✦

आधुनिक विज्ञान क्या कहता है?

प्राचीन ग्रंथों में जो बातें हजारों साल पहले लिखी गईं, आज का विज्ञान उन्हें धीरे-धीरे सिद्ध कर रहा है।

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Journal of Ayurveda (2016)
पारद-आधारित नैनोस्केल दवाओं में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए गए।
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इम्यूनिटी बूस्टर
शुद्ध पारद-आधारित औषधियाँ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक पाई गईं।
⚗️
आधुनिक रसायन
Mercury (Hg) एकमात्र तरल धातु — Amalgam बनाने की अद्वितीय क्षमता जो आयुर्वेद ने हजारों साल पहले कही।
⚠️
सुरक्षा जानकारी
केवल अष्ट संस्कार से शुद्ध पारद ही पूजनीय है। पारद औषधियाँ केवल प्रमाणित वैद्य की सलाह पर लें।
✦ ॐ ✦

श्री पारदेश्वर शिव मंदिर की विशेषताएँ

इस मंदिर की वास्तुकला नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर से प्रेरित है — महाराष्ट्र में यह शैली बेहद दुर्लभ है।

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111 किलो पारद शिवलिंग
भारत में केवल 4-6 ऐसे शिवलिंग मौजूद हैं
🟡
151 किलो गंधक वेदी
शुद्ध सल्फर की दुर्लभ वेदी पर स्थापित
🏛️
पशुपतिनाथ शैली
नेपाल के प्रसिद्ध मंदिर जैसी दुर्लभ वास्तुकला
🔔
75 किलो का घंटा
काँसे का विशाल घंटा जिसकी ध्वनि से गूँजता है “ॐ”
🏺
पंचकलश
पाँच पीतल कलश — बद्रीनाथ-केदारनाथ जैसी गोल शैली
🐂
कर्नाटक शैली नंदी
महाराष्ट्र के मंदिरों में न मिलने वाला दुर्लभ नंदी
🦁
यक्ष-यक्षिणी मूर्तियाँ
मानव शरीर, सिंह मुख — विनम्र और शांत भाव
🐗
वराह मुख
गर्भगृह द्वार पर — किसी शिव मंदिर में दुर्लभ

विशेष जानकारी: मुख्य पारद शिवलिंग पर सीधे जल चढ़ाना संभव नहीं है, इसलिए भक्तों के लिए अभिषेक हेतु अलग शिवलिंग स्थापित किया गया है।

✦ ॐ ✦

मंदिर परिसर के अन्य मंदिर

यह परिसर एक सम्पूर्ण तीर्थस्थल है — यहाँ कई दिव्य मंदिर हैं जो इसे और खास बनाते हैं:

🙏
साढ़े तीन पीठ (सिद्ध पीठ)
रेणुका माता, तुलजा भवानी, सप्तश्रृंगी दुर्गा — नवरात्रि पर भव्य उत्सव
💛
श्री लक्ष्मी कुबेर मंदिर
अमावस्या पर विशेष लक्ष्मी पूजन — धन-समृद्धि के लिए
🐘
श्री गणपति मंदिर
बाधाओं को दूर करने वाले गणेश जी का शांत स्थान
🙏
श्री दत्तात्रेय मंदिर
दत्त जयंती पर भव्य उत्सव और भजन
💪
श्री हनुमान मंदिर
मंगलवार-शनिवार विशेष दर्शन — संकट मोचन
नवग्रह देवता मंदिर
नौ ग्रहों की शांति — कुंडली दोष निवारण
📚
श्री सरस्वती मंदिर
विद्यार्थियों के लिए — वसंत पंचमी पर विशेष पूजन
⚔️
कार्तिक स्वामी मंदिर
कार्तिक पूर्णिमा पर तीन दिवसीय उत्सव
🔥
काल भैरव मंदिर
काल भैरव अष्टमी पर विशेष पूजन
🌸
विट्ठल रुक्मिणी मंदिर
आषाढ़ी एकादशी पर भव्य वारी उत्सव
✦ ॐ ✦

पूजा और अनुष्ठान सेवाएँ

सभी पूजाएँ अनुभवी पंडितों द्वारा वैदिक परंपरा के अनुसार संपन्न होती हैं।

पूजा/अनुष्ठान किनके लिए उपयुक्त
रुद्राभिषेक / महा रुद्राभिषेकपारिवारिक शांति, व्यापार वृद्धि, आध्यात्मिक उन्नति
लक्ष्मी-कुबेर अभिषेकधन-संपत्ति, व्यवसाय की समस्याएं, आर्थिक स्थिरता
गणपति अथर्वशीर्ष पाठजीवन की बाधाएं, विवाह में विलंब
महामृत्युंजय जापस्वास्थ्य, दीर्घायु, भय निवारण
काल सर्प शांतिकाल सर्प दोष — विवाह, संतान, करियर बाधाएं
नवग्रह शांतिग्रह दोष निवारण, जीवन में संतुलन
नक्षत्र / मूल शांतिजन्म नक्षत्र दोष, पारिवारिक समस्याएं
सप्तशती चंडी पाठनकारात्मक ऊर्जा से रक्षा, माँ दुर्गा की कृपा
✦ ॐ ✦

पारद शिवलिंग के प्रमुख लाभ (ग्रंथ अनुसार)

🙏
हजार शिवलिंगों की पूजा का फल
स्रोत: ब्रह्म पुराण
अष्ट सिद्धियाँ, मोक्ष और जीवनमुक्ति
स्रोत: शारंगधर संहिता
💛
माँ लक्ष्मी का पीढ़ियों तक निवास
स्रोत: रुद्र संहिता
🌿
शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक रोगों से मुक्ति
स्रोत: पारद संहिता
🛡️
अकाल मृत्यु का भय समाप्त
स्रोत: रुद्र संहिता
💰
धन, आरोग्य, पद-प्रतिष्ठा और सुख
स्रोत: पारद शिवलिंग महात्म्य
🔱
12 ज्योतिर्लिंगों के पूजन का पुण्य
स्रोत: पारद शिवलिंग महात्म्य
👶
संतान प्राप्ति में सहायक
स्रोत: पारद शिवलिंग महात्म्य
☮️
मानसिक शांति और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति
स्रोत: आधुनिक व्याख्या
✦ ॐ ✦

महामृत्युंजय मंत्र — ऋग्वेद 7.59.12

पारदेश्वर मंदिर में नियमित महामृत्युंजय जाप होता है। यह वेद का सबसे पवित्र मंत्र माना गया है:

ऋग्वेद 7.59.12
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
— ऋग्वेद 7.59.12
🔖 सरल हिंदी अर्थ
हम तीन आँखों वाले भगवान शिव की उपासना करते हैं जो जीवन को शक्ति और पोषण देने वाले हैं। जिस प्रकार ककड़ी अपनी बेल से स्वयं मुक्त हो जाती है, उसी प्रकार हे प्रभु — हमें दुख, भय और मृत्यु के बंधनों से मुक्त करके अमृत समान शांति प्रदान करें।
✦ ॐ ✦

FAQ — आपके मन के सवाल, यहाँ मिलेंगे जवाब

पारद शिवलिंग क्या है और यह सामान्य शिवलिंग से कैसे अलग है?
पारद शिवलिंग शुद्ध पारे (Mercury) से बना शिवलिंग होता है। अष्ट संस्कार नामक आठ चरणों की वैज्ञानिक शुद्धि प्रक्रिया के बाद पारद को ठोस रूप दिया जाता है। सामान्य शिवलिंग पत्थर, मिट्टी या धातु से बनते हैं, जबकि पारद शिवलिंग को ग्रंथों में सबसे दिव्य और शक्तिशाली माना गया है। ब्रह्म पुराण के अनुसार इसके दर्शन मात्र से हजार शिवलिंगों की पूजा का फल मिलता है।
भारत में कितने पारद शिवलिंग मौजूद हैं?
पूरे भारत में केवल 4 से 6 पारद शिवलिंग मौजूद हैं। श्री पारदेश्वर शिव मंदिर, संभाजीनगर में स्थापित 111 किलो का पारद शिवलिंग इनमें से एक है — जो इसे एक अत्यंत दुर्लभ और विशेष तीर्थस्थल बनाता है।
अष्ट संस्कार क्या है? इससे पारद कैसे शुद्ध होता है?
अष्ट संस्कार पारद को शुद्ध करने की आठ चरणों की प्राचीन वैज्ञानिक प्रक्रिया है — स्वेदन (उबालना), मर्दन (पीसना), मूर्च्छन, उत्थापन, पातन (आसवन), रोधन (बाँधना), नियामन और दीपन। इन आठ चरणों के बाद कच्चा विषैला पारद पूरी तरह शुद्ध, ठोस और पूजनीय बन जाता है। प्रथम पाँच संस्कारों से पारद सर्वदोषमुक्त होता है और शेष तीन से उसमें बल और तेज बढ़ता है।
श्री पारदेश्वर शिव मंदिर कहाँ है और कैसे पहुँचें?
मंदिर कानापुर शिवार, पलशी रोड, छत्रपती संभाजीनगर (औरंगाबाद), महाराष्ट्र – 431008 में स्थित है। यह पिसादेवी गाँव से 3-4 किलोमीटर की दूरी पर है। संभाजीनगर वायु, रेल और सड़क तीनों मार्गों से अच्छी तरह जुड़ा है। संपर्क: +91 91681 19081।
मंदिर में कौन-कौन सी पूजाएँ और अनुष्ठान होते हैं?
मंदिर में रुद्राभिषेक, लघु रुद्राभिषेक, महा रुद्राभिषेक, लक्ष्मी-कुबेर अभिषेक, गणपति अथर्वशीर्ष पाठ, महामृत्युंजय जाप, नवग्रह शांति, काल सर्प शांति, सप्तशती चंडी पाठ, नक्षत्र शांति और मूल शांति जैसे अनुष्ठान होते हैं। सभी पूजाएँ अनुभवी पंडितों द्वारा वैदिक परंपरा के अनुसार संपन्न होती हैं।
मंदिर में कौन-कौन से त्योहार मनाए जाते हैं?
मंदिर में चैत्र नवरात्रि, शारद नवरात्रि, महाशिवरात्रि, कार्तिक पूर्णिमा (तीन दिवसीय उत्सव), दत्त जयंती, हनुमान जयंती, गणेश जयंती, आषाढ़ी एकादशी, अमावस्या (लक्ष्मी पूजन), वसंत पंचमी और तुलसी विवाह बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं।
✦ ॐ ✦

स्रोत और संदर्भ

  • ब्रह्म पुराण — पारद शिवलिंग की पूजा और मोक्ष
  • शारंगधर संहिता (अध्याय 12) — अष्ट सिद्धियाँ
  • रुद्र संहिता (शिव पुराण) — माँ लक्ष्मी निवास
  • पारद संहिता — अष्ट संस्कार और रोग मुक्ति
  • शिव पुराण — “मम बीजं तू पारदः”
  • रस रत्न समुच्चय — पारद का रसायन महत्व
  • रसरत्नाकर — आचार्य नागार्जुन रचित
  • Journal of Ayurveda & Integrative Medicine (2016)
  • ऋग्वेद 7.59.12 — महामृत्युंजय मंत्र

मंदिर की जानकारी

📍 पता कानापुर शिवार, पलशी रोड,
छत्रपती संभाजीनगर, महाराष्ट्र 431008
📞 संपर्क +91 91681 19081
🌐 वेबसाइट shripardeshwarshivmandir.in

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