अधिक मास विशेष जानकारी
भगवान विष्णु का पवित्र महीना
आता है अधिक मास
उस वर्ष में
पुण्य इस माह में
आता है यह मास
अधिक मास क्या है?
हिंदू पंचांग में अधिक मास — जिसे मलमास, पुरुषोत्तम मास या लौंद मास भी कहते हैं — एक विशेष अतिरिक्त महीना होता है जो लगभग हर 32.5 महीनों में एक बार आता है। यह महीना हिंदू कैलेंडर की एक अद्भुत खगोलीय व्यवस्था का परिणाम है जो सौर वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच के अंतर को संतुलित करती है।
भगवान विष्णु ने स्वयं इस महीने को स्वीकार किया और अपना नाम “पुरुषोत्तम” दिया। इसीलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं। यह मास सभी मासों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
“जो व्यक्ति अधिक मास में भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और दान करता है, उसे कोटि यज्ञों के समान फल की प्राप्ति होती है।”
— पुरुषोत्तम माहात्म्य, स्कंद पुराणश्री पारदेश्वर शिव मंदिर की ओर से हम आप सभी भक्तों को इस पवित्र माह की सम्पूर्ण जानकारी प्रदान कर रहे हैं ताकि आप इस दुर्लभ और पुण्यकारी अवसर का पूरा लाभ उठा सकें।
अधिक मास क्यों आता है?
इसे समझने के लिए हमें हिंदू पंचांग की गणना पद्धति को समझना होगा। हमारा चंद्र वर्ष 354 दिनों का होता है जबकि सौर वर्ष 365 दिनों का। इनके बीच हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर होता है।
354 दिन — 12 चंद्र माह। तिथियां, व्रत, उत्सव सब चंद्रमा की गति पर आधारित।
365.25 दिन — ऋतुओं का चक्र सूर्य की गति पर निर्भर। दोनों में 11 दिन का फर्क।
3 वर्षों में यह अंतर 33 दिन हो जाता है, जो एक पूरे माह के बराबर होता है।
इस अंतर को पूरा करने के लिए प्रत्येक 32.5 महीने में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है।
अधिक मास उस महीने के साथ जोड़ा जाता है जिसमें सूर्य किसी राशि में प्रवेश नहीं करता। इस महीने में कोई संक्रांति नहीं होती। इसी विशेषता के कारण यह महीना “मलमास” कहलाता था, लेकिन भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम देकर पवित्र कर दिया।
अधिक मास का आध्यात्मिक महत्त्व
भगवान पुरुषोत्तम (विष्णु) ने स्वयं इस मास को अपना नाम दिया। पद्म पुराण और स्कंद पुराण में वर्णित कथाओं के अनुसार, जब अधिक मास रोने लगा कि उसका कोई स्वामी नहीं है, तब भगवान विष्णु ने उसे अपनाया और कहा — “आज से तुम मेरे नाम से जाने जाओगे।”
भगवान विष्णु का यह द्वादशाक्षर मंत्र अधिक मास में विशेष फलदायी है
इस मास की विशेष शक्तियां
साधारण महीनों में किए गए पुण्य से 100 गुना अधिक फल इस माह में मिलता है।
इस माह में की गई भागवत कथा, गीता पाठ से विशेष ज्ञान और मोक्ष मिलता है।
अन्न, वस्त्र, गाय, स्वर्ण का दान इस मास में अक्षय पुण्य प्रदान करता है।
जन्म जन्मांतर के पाप इस माह की साधना, व्रत और भजन से नष्ट होते हैं।
अधिक मास 2026 — तिथि व महत्त्वपूर्ण दिन
इस बार अधिक मास श्रावण माह के साथ जुड़ा हुआ है। इस वर्ष के अधिक मास में निम्नलिखित विशेष दिन पड़ते हैं:
| तिथि / दिन | विशेष महत्त्व | पूजा विधि |
|---|---|---|
| प्रतिपदा (पहला दिन) | अधिक मास आरंभ शुभारंभ | संकल्प लें, व्रत आरंभ |
| एकादशी (प्रत्येक) | विष्णु एकादशी व्रत विशेष | पूर्ण व्रत, विष्णु सहस्रनाम |
| पूर्णिमा | सत्यनारायण कथा का दिन | कथा श्रवण, गंगा स्नान |
| अमावस्या | पितृ तर्पण का दिन | पितृ श्राद्ध, तिल दान |
| प्रत्येक सोमवार | शिव पूजन अधिक फल | रुद्राभिषेक, बेलपत्र अर्पण |
| प्रत्येक गुरुवार | विष्णु पूजा दिवस | तुलसी पूजा, पीला वस्त्र दान |
| अंतिम दिन (पूर्णिमा) | अधिक मास समापन महादान | विशेष दान, ब्राह्मण भोजन |
अधिक मास में क्या करें? — पूर्ण साधना विधि
श्री पारदेश्वर शिव मंदिर के पुजारियों के अनुसार इस पवित्र माह में निम्नलिखित नित्य और विशेष साधनाएं करनी चाहिए:
सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। “मैं इस अधिक मास में भगवान पुरुषोत्तम की भक्ति करूंगा/करूंगी” — यह संकल्प लें। संभव हो तो नदी स्नान करें।
प्रत्येक दिन भगवान विष्णु के 1000 नामों का पाठ करें। यदि संपूर्ण पाठ संभव न हो तो कम से कम “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का 108 बार जाप करें।
इस माह में श्रीमद्भागवत गीता के किसी एक अध्याय का नित्य पाठ करें। विशेषतः 11वां अध्याय (विश्वरूप दर्शन) अत्यंत फलदायी है।
तुलसी माता को जल, फूल, चंदन अर्पित करें। प्रतिदिन शाम को तुलसी के समक्ष घी का दीपक जलाएं। तुलसी भगवान विष्णु की प्रिय हैं।
इस माह में अन्न दान, वस्त्र दान, गौ सेवा और जरूरतमंदों की सहायता करें। हर एकादशी को किसी ब्राह्मण या गरीब को भोजन कराएं।
प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट सत्संग में भाग लें या भक्ति संगीत सुनें। “हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे” — महामंत्र का जाप विशेष लाभकारी है।
क्या करें और क्या न करें
- प्रतिदिन विष्णु पूजा करें
- एकादशी व्रत रखें
- गीता और भागवत पाठ करें
- दान — अन्न, वस्त्र, धन
- तुलसी सेवा और दीपदान
- सत्संग और भजन कीर्तन
- गौ सेवा और ब्राह्मण भोजन
- तीर्थ यात्रा यदि संभव हो
- विवाह और सगाई न करें
- गृह प्रवेश, मुंडन न करें
- नए व्यवसाय की शुरुआत न करें
- नए मकान की नींव न रखें
- तामसिक भोजन से दूर रहें
- मांस, मदिरा का सेवन न करें
- क्रोध और झूठ से बचें
- शुभ संस्कार इस माह न करें
शास्त्रों के अनुसार अधिक मास में 16 प्रकार के शुभ संस्कार वर्जित हैं। हालांकि, मंदिर में जाना, ईश्वर की पूजा करना, दान देना और भजन-कीर्तन कभी भी वर्जित नहीं हैं — ये तो और अधिक पुण्यदायक हैं। किसी भी संशय की स्थिति में अपने कुलगुरु या पुजारीजी से परामर्श लें।
पुरुषोत्तम मास की कथा
पद्म पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, एक समय अधिक मास बहुत दुखी था। सभी 12 महीनों के अपने-अपने देवता थे — कार्तिक के विष्णु, श्रावण के शिव, भाद्रपद के गणेश, आदि। लेकिन अधिक मास का कोई स्वामी नहीं था।
अधिक मास रोते हुए ब्रह्माजी के पास गया। ब्रह्माजी ने कहा — “तुम विष्णुलोक जाओ।” अधिक मास वैकुंठधाम पहुंचा और भगवान विष्णु के चरणों में गिर पड़ा।
“हे प्रभु! सभी महीनों के कोई न कोई देवता हैं, लेकिन मेरा कोई नहीं। मैं अपवित्र, मलमास कहलाता हूं। लोग मुझमें कोई शुभ कार्य नहीं करते।”
— अधिक मास का विलाप, पद्म पुराणभगवान विष्णु ने मुस्कुराते हुए कहा — “आज से तुम मेरे हो। मेरा नाम ‘पुरुषोत्तम’ तुम्हें देता हूं। जो व्यक्ति इस महीने में मेरी भक्ति करेगा, उसे अन्य सभी महीनों में की गई पूजा से अधिक फल मिलेगा।”
इस पवित्र कथा का सार यही है कि अधिक मास में की गई भक्ति सीधे भगवान पुरुषोत्तम (विष्णु) को प्रसन्न करती है। मंदिर में इस माह में प्रतिदिन सत्संग, भागवत पाठ और विशेष पूजा का आयोजन होता है। सभी भक्त आमंत्रित हैं।
श्री पारदेश्वर शिव मंदिर में पधारें और इस पुण्यकारी माह में भगवान विष्णु और शिव की विशेष कृपा प्राप्त करें।
पूजा बुक करें या मंदिर के कार्यक्रमों की जानकारी लें।
